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अमेरिका ने कम की वैक्सीन की डोज लेकिन भारत में अभी भी बच्चों को क्यों जरूरी हैं सभी टीके? ये है वजह |

अमेरिका ने अपने वैक्सीनेशन प्रोग्राम में बड़ा बदलाव किया है. अब वहां बच्चों को 17 की जगह 11 टीके ही लगेंगे, अमेरिका में ये बदलाव बीमारियों की संक्रमण दर के आधार पर किया है, तो क्या ऐसे में अब भारत में भी वैक्सीनेशन बदलना चाहिए. इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं.

अमेरिका में बच्चों के टीकाकरण नीति में बदलाव किया गया है. अब वहां 17 बीमारियों के बजाय केवल 11 बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन को अनिवार्य किया गया है. हालांकि अन्य बीमारियों में भी वैक्सीन लगवा सकते हैं, लेकिन जो टीके लगने ही हैं उनकी संख्या को घटा दिया गया है. अमेरिका के इस फैसले के बाद एक सवाल यह भी है कि क्या अब भारत में भी बच्चों को लगने वाली वैक्सीन संख्या को कम करने की जरूरत है? ये जानने के लिए हमने एक्सपर्ट से बातचीत की है.

पहले ये जान लेते हैं कि अमेरिका में टीकों की संख्या कम क्यों की गई है. वहां सीडीसी ने कहा है कि 11 टीके तो जरूरी हैं, लेकिन इनके अलावा अन्य वैक्सीन रिस्क के आधार पर ही लगेंगी.इसका मतलब है कि वहां बीमारी के खतरे और निगरानी सिस्टम को ध्यान में रखकर फैसले लिए गए हैं. भारत की बात करें तो यहां राष्ट्रीय टीकाकरण प्रोग्राम चलता है. इसके तहत सरकार करीब 15 बीमारियों के लिए 12 तरह की अलग- अलग वैक्सीन लगाती हैं. इनके अलावा भी कुछ टीके लोग लगवा सकते हैं जो प्राइवेट अस्पतालों में लगते हैं. हालांकि 11 टीके ही सभी बीमारियों से बचाव के लिए पर्याप्त होते हैं.

भारत में अमेरिका से अलग है स्थिति

दिल्ली एम्स में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ हिमांशु भदानी बताते हैं किभारत जैसे देश में हालात अमेरिका से बिल्कुल अलग हैं. यहां आज भी कई इलाकों में साफ पानी और स्वच्छता की कमी है. अमेरिका की तुलना में आबादी ज्यादा है और संक्रमण का रिस्क भी अधिक है. ऐसे में यहां बच्चों के लिए सभी वैक्सीन बेहद जरूरी है.

डॉ भदानी बताते हैं कि भारत में अब भीखसरा, डिप्थीरिया, हेपेटाइटिस-B, काली खांसी, टिटनेस जैसी बीमारियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. यही कारण है कि भारत सरकार का यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) बच्चों को 12 से ज्यादा जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए बनाया गया है.

भारत में कितने टीके जरूर लगवाएं

डॉ भदानी कहते हैं कि भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण प्रोग्राम के तहत 12 टीके लगते हैं जो करीब 15 बीमारियों से बचाते हैं. हर माता- पिता के लिए जरूरी है कि वह अपने बच्चों को ये सभी टीके लगवा दें. कम टीके न लगवाएं. ऐसा इसलिए क्योंकिमेरिका में भी टीकों की संख्य़ा 17 से घटाकर 11 की गई है, लेकिन अन्य टीकों को भी ऐसा नहीं है कि नहीं लगाया जाएगा. बच्चों के रिस्क और डॉक्टर की सलाह पर ये टीके भी लगवा सकते हैं, लेकिन भारत में ऐसा करना मुमकिन नहीं है. क्योंकि यहां आज भी अधिकतर बच्चे कई तरह की बीमारियों के रिस्क में होते हैं.

अगर भारत में टीकाकरण कम हुआ तो क्या होगा?

डॉ भदानी कहते हैं कि अमेरिका की तर्ज पर यहां वैक्सीनेशन कभी कम नहीं किया जा सकता है. न ही ऐसा कोई फैसला लिए जाने की संभावना है. भारत में जो राष्ट्रीय टीकाकरण प्रोग्राम चलता है उसमें भविष्य में और भी टीकों को शामिल करने की योजना है. ऐसे में टीकाकरण कम करने का कोई मतलब नहीं है. अगर ऐसा होता भी है तो पुरानी बीमारियां वापस आ सकती हैं और शिशु मृत्यु दर बढ़ सकती है.

 

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