Edited By - ZAHID ALI
जयपुर की 12 वर्षीय बैडमिंटन खिलाड़ी पद्मजा सिंह ने ओएन दीक्षित मेमोरियल जयपुर विंटर ओपन बैडमिंटन प्रतियोगिता में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. उन्होंने अंडर-13 से लेकर सीनियर कैटेगरी तक कुल 7 स्पर्धाओं में भाग लिया और सातों में स्वर्ण पदक जीता. अपनी उम्र से बड़े और सीनियर खिलाड़ियों को हराकर चैंपियन बनीं पद्मजा में सायना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसी फुर्ती देखी जा रही है. उनकी यह उपलब्धि जयपुर के जूनियर खेल जगत के लिए एक नई प्रेरणा बनकर उभरी है.

जयपुर के खेल जगत में नन्हे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा से अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिग्गजों की याद दिला रहे हैं. हाल ही में सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित ओएन दीक्षित मेमोरियल जयपुर विंटर ओपन बैडमिंटन प्रतियोगिता में 12 वर्षीय पद्मजा सिंह ने अपने असाधारण खेल से तहलका मचा दिया. पद्मजा ने इस टूर्नामेंट की कुल 7 श्रेणियों में भाग लिया और किसी भी मैच में हारे बिना सभी में खिताब अपने नाम किए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने अंडर-13 से लेकर सीनियर कैटेगरी तक में अपने से काफी बड़े और अनुभवी खिलाड़ियों को पटखनी देकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की.पद्मजा सिंह ने बैडमिंटन की शुरुआत महज एक शौक के तौर पर की थी, लेकिन आज वह राजस्थान के शीर्ष शटलर्स में अपनी जगह बना चुकी हैं. ओएन दीक्षित मेमोरियल जयपुर विंटर ओपन बैडमिंटन प्रतियोगिता में एक ही साथ सात खिताब जीतकर उन्होंने ‘सत्ते पे सत्ता’ जड़ दिया है, जो उनकी उम्र के हिसाब से एक असाधारण उपलब्धि है. गौरतलब है कि अंडर-13 आयु वर्ग में होने के बावजूद पद्मजा ने सीनियर लेवल के खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी. उन्होंने अंडर-15 डबल्स, अंडर-19 गर्ल्स सिंगल्स और अंडर-17 सिंगल्स जैसी श्रेणियों में अनुभवी खिलाड़ियों को 21-10 जैसे बड़े अंतर से हराकर अपनी श्रेष्ठता साबित की.पद्मजा सिंह जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा हैं, जो न केवल खेल बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अव्वल रहती हैं. वह हर कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर प्रथम स्थान प्राप्त करती रही हैं. मात्र कुछ वर्ष पहले बैडमिंटन की शुरुआत करने वाली 12 वर्षीय पद्मजा ने इतनी छोटी उम्र में अंडर-13 से लेकर सीनियर वर्ग तक की चैंपियन बनकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. राजस्थान के कई बैडमिंटन कोच और विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश के किसी भी शटलर ने शायद ही इतनी कम उम्र में पहले कभी ऐसी ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की हो.पद्मजा सिंह ने मात्र 12 साल की उम्र में जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के कई ओपन टूर्नामेंट जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. उन्होंने राजस्थान बैडमिंटन ओपन चैंपियनशिप के गर्ल्स सिंगल्स (U-13) वर्ग में राज्य चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है. पद्मजा की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अब तक जिन भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, उनमें केवल स्वर्ण पदक (Gold) ही जीते हैं. हाल ही में एक साथ 7 गोल्ड मेडल जीतने की उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें ‘शांति मेहता स्कॉलरशिप’ से भी नवाजा गया है. अपने इसी शानदार प्रदर्शन के दम पर पद्मजा आगामी नेशनल चैंपियनशिप में राजस्थान राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.पद्मजा सिंह ने अपने बैडमिंटन करियर की शुरुआत जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम स्थित बैडमिंटन एकेडमी से की थी. वर्तमान में वह स्पोर्ट्स काउंसिल के बैडमिंटन कोच यादवेन्द्र सिंह और अमन से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं. अपनी हालिया ऐतिहासिक जीत के बाद पद्मजा ने अपने भविष्य के लक्ष्यों को लेकर स्पष्ट विजन साझा किया. उन्होंने कहा, “मुझे साइना नेहवाल या पीवी सिंधू नहीं, बल्कि स्पेनिश खिलाड़ी कैरोलिना मारिन बनना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नेशनल लेवल की तैयारी के लिए भविष्य में उन्हें जयपुर से बाहर भी जाना पड़े, तो वह इसके लिए तैयार हैं. हालांकि, उन्होंने अपने वर्तमान प्रशिक्षकों पर भरोसा जताते हुए कहा कि फिलहाल एसएमएस स्टेडियम में यादवेन्द्र और अमन सर की उत्कृष्ट ट्रेनिंग के बदौलत ही उन्होंने यह सफलता हासिल की है.
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