UGC के नए कानून का सामान्य वर्ग खुलकर विरोध कर रहा है। लोग सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। इस बीच मोदी सरकार के इस फैसले को BJP के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
हिन्द न्यूज | राजनीति | 28 जनवरी 2026 | पोस्टेड बाइ – जाहिद अली

UGC News : यूजीसी (UGC) के नियमें के खिलाफ सोशल मीडिया पर उठे तूफान के बीच देश की सियासत भी गरमा रही है। यूजीसी ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों मैं जातिगत भेदभाव को रोकने का हवाला देते हुए ये नियम तैयार किए हैं। सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के संगठनों के सवाल हैं कि क्या उनके लिए समानता के नियम लागू नहीं होते हैं? पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर खुलकर नहीं बोल रहे हैं। छात्र यह भी कह रहे हैं कि नेता तो अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए भेज देते हैं और उन पर नए नियमों का कोई असर नहीं होगा।
Supreme Court को दी जाएगी जानकारी
मामले को बढ़ता देख सरकार हरकत में आ रही है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है और शिक्षा मंत्रालय (Education Ministry) को कोर्ट के सामने तर्क देना होगा मंत्रालय इस मसले पर कानूनी सलाह भी ले रहा है। सूत्रों का कहना है कि यूजीसी की ओर से पूरे मसले पर जल्द ही तथ्य रखे जाएंगे। चूंकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जब मामले की सुनवाई होगी तो यूजीसी की ओर से नए नियमों को जारी करने पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
Education Minister ने क्या कहा, जानें
UGC Row: ये तीन बड़े सवाल
यूजीसी ने 13 जनवरी2025 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशन’ रेगुलेशंस 2026 जारी किए। इन नियमों के खिलाफ तीन सबसे बड़े सवाल सामने आए हैं।
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जातिगत भेदभाव रोकने के पहला सवाल नियम पहले से थे, लेकिन 2026 के संशोधित प्रावधानों में इसकी परिभाषा का दायरा बढ़ा अब ‘जाति आधारित भेदभाव’ में SC/ ST के साथ OBC समुदाय के छात्र और कर्मचारी भी शामिल हैं। नए नियम इन वर्गों की शिकायतों पर अनिवार्य कार्रवाई को बाध्य करते है, वही सामान्य वर्ग के छात्र बराबरी का सवाल उठा रहे है।
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2012 के प्रावधानों में भेदभाव से जुड़ी झूठी शिकायतों पर दंड और जुर्माने का प्रावधान नहीं था। 2025 के ड्राफ्ट में दंड की सिफारिश की गई, लेकिन 2026 के रेगुलेशन में इन्हें हटा दिया गया है। तर्क दिया गया कि इससे असल पीड़ित बिना डर के शिकायत कर सकेंगे। पहचान भी गोपनीय रहेगी। विरोधी कह रहे कि झूठी शिकायतें बढ़ सकती है। सामान्य वर्ग में असुरक्षा की आशंका भी पैदा हो सकती है।
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नए नियम में समता समिति बनाने का प्रावधान है। इस समिति में OBC, दिव्यांगजन, SC/ ST महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा। छात्र सवाल उठा रहे है कि समता समिति में सवर्ण प्रतिनिधि नहीं है। झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। क्या पहले से मान लिया कि सामान्य वर्ग से भेदभाव नहीं होता है। संविधान में समानता, कैंपस में क्यों नहीं ?
Bharatiya Janata Party के लिए चुनौती?
यूजीसी के नए नियम बीजेपी के लिए चुनौती बनते दिख रहे हैं, क्योंकि बीजेपी के अंदर ही इसका विरोध हो रहा है। बीजेपी के कई जिला और राज्य स्तर के पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा दिया है। और लगातार सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं। यूजीसी के नए नियम को जनरल कैटिगरी के लोगों के साथ भेदभाव वाला बताया जा रहा है। जनरल कैटिगरी के कई बीजेपी नेता सवाल उठा रहे हैं, जिस तरह लगातार विरोध और पत्र लिखकर विरोध जताना जारी है, उससे सरकार के सामने दुविधा की स्थिति दिख रही है। इस साल उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल (West Bengal) समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और यूजीसी का मुद्दा अगर इसी तरह चलता रहा तो ये बीजेपी के लिए दिक्कत खड़ी कर सकता है।

