हिन्द न्यूज | भारत | 10 जनवरी 2026 | पोस्टेड बाइ – जाहिद अली

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और अमरीका की पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते में रुचि है और वे इसे जल्द से जल्द पूरा करने के लिए तत्पर हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अमरीका पिछले साल 13 फरवरी से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि तब से दोनों पक्षों ने संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए कई दौर की बातचीत की है। श्री जायसवाल ने बताया कि दोनों देश कई मौकों पर समझौते के करीब पहुंचे हैं। अमरीका के वाणिज्य मंत्री की हाल के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खबरों में जिन चर्चाओं का उल्लेख किया गया है वे सटीक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल आठ बार फोन पर बातचीत की जिसमें व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और निकायों से अमरीका के हटने के बारे में श्री जायसवाल ने कहा कि भारत बहुपक्षवाद का समर्थक है और उसका मानना है कि वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए सभी देशों की राय और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन ने अपने 125 सदस्य देशों के बीच सौर ऊर्जा के उपयोग और सहयोग को बढ़ावा देने के अपने उद्देश्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखेगा।
अमरीकी कांग्रेस में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर उच्च शुल्क लगाने के प्रस्ताव वाले विधेयक के संबंध में श्री जायसवाल ने कहा कि भारत घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा स्रोतों के व्यापक मुद्दे पर भारत का दृष्टिकोण सर्वविदित है। इस प्रयास में भारत वैश्विक बाजार की बदलती गतिशीलता और अपनी एक अरब चालीस करोड़ की आबादी की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से सस्ती ऊर्जा प्राप्त करने की अनिवार्यता पर चलता है।
शाक्सगाम घाटी से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में श्री जायसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि शाक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है और भारत ने 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि यह समझौता अवैध और अमान्य है। उन्होंने कहा कि भारत उसके क्षेत्र से गुजरने वाले तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को भी मान्यता नहीं देता है। प्रवक्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह बात पाकिस्तानी और चीन के अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष ने शाक्सगाम घाटी में जमीनी हकीकत को बदलने के प्रयासों के खिलाफ चीन के साथ लगातार विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है।
ताइवान के पास चीन के सैन्य अभ्यासों के संबंध में श्री जायसवाल ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक, आर्थिक, जन-संबंधी और समुद्री हितों को देखते हुए इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत की गहरी रुचि है।
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने, एकतरफा कार्रवाई से बचने और बल प्रयोग या धमकी के बिना शांतिपूर्ण तरीकों से सभी मुद्दों को हल करने का आग्रह किया।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में श्री जायसवाल ने कहा कि चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर बार-बार हमले किए जाने का एक चिंताजनक सिलसिला देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी सांप्रदायिक घटनाओं से तुरंत और दृढ़ता से निपटना आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी घटनाओं को व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता, राजनीतिक मतभेद या बाहरी कारणों से जोड़ने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि इस तरह की उपेक्षा अपराधियों को और भी बेखौफ बनाती है और अल्पसंख्यकों के बीच भय और असुरक्षा की भावना को बढ़ावा देती है।
मिनियापोलिस गोलीबारी के संबंध में श्री जायसवाल ने कहा कि घटनाक्रम पर भारत की बारीक नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत इस बात को लेकर चिंतित है कि अमरीका में छात्रों, पेशेवरों और अन्य लोगों सहित एक बड़ा भारतीय समुदाय रहता है।
सोमालीलैंड को मान्यता देने के मुद्दे पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत के सोमालिया के साथ दीर्घकालिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के महत्व पर लगातार जोर देता रहेगा।

