छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार ने MSME, हस्तशिल्प और हथकरघा सेक्टर के लिए 58 करोड़ रुपए के अनुदान को हरी झंडी दी।
हिन्द न्यूज | कारोबार | 12 जनवरी 2026 | पोस्टेड बाइ – जाहिद अली
जयपुर: राजस्थान के उद्योग विभाग ने रविवार को एकीकृत क्लस्टर विकास योजना के तहत कुल 58 करोड़ रुपए के अनुदान को मंजूरी दे दी है। यह अनुदान राज्य के छोटे और मध्यम उद्योगों MSME। हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को नई ताकत देने के लिए दिया जा रहा है।
इस योजना के तहत नई तकनीक अपनाना, बेहतर कौशल विकास, ट्रेनिंग, उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाना और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना शामिल है। विभाग ने 9 जिलों में कुल 10 क्लस्टर के लिए 10 प्रोजेक्ट पास किए हैं। इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत लगभग 60 करोड़ रुपए है। राज्य सरकार इनके स्वीकृत हिस्से की 80 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक फंडिंग करेगी। जिससे छोटे उद्यमियों और कारीगरों पर आर्थिक बोझ बहुत कम हो जाएगा।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर CFC कहां बनेंगे
इन सेंटर्स से 100 से ज्यादा माइक्रो और छोटी औद्योगिक इकाइयों को सीधा फायदा होगा। ये इकाइयां आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ा सकेंगी और बेहतर क्वालिटी का सामान बना सकेंगी। आधुनिक मशीनों से लैस कॉमन फैसिलिटी सेंटर इन जिलों में बनाए जाएंगे जानिए…
ट्रेनिंग का प्लान
जयपुर, चूरू और झुंझुनू के 300 से ज्यादा हस्तशिल्पकारों और कारीगरों को विशेषज्ञों द्वारा खास ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पूरी ट्रेनिंग की लागत लगभग 1.18 करोड़ रुपए राज्य सरकार खुद वहन करेगी। कोई भी खर्च कारीगरों पर नहीं डाला जाएगा।
जानिए किन क्षेत्रों में क्या खास मदद मिलेगी
इस योजना के तहत राज्य के अलग-अलग जिलों में संचालित प्रमुख उद्योगों और पारंपरिक कामकाज को विशेष सहयोग दिया जाएगा। क्लस्टर आधारित विकास से स्थानीय उद्यमों को आधुनिक तकनीक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा।
कोटपूतली-बहरोड़ – इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन क्लस्टर को मजबूती दी जाएगी। जिससे औद्योगिक उपकरण, मशीन पार्ट्स और फैब्रिकेशन से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में सुधार होगा।
बालोतरा – टेक्सटाइल प्रोसेसिंग क्लस्टर के तहत कपड़ा प्रसंस्करण से जुड़ी इकाइयों को आधुनिक मशीनरी और सुविधाएं मिलेंगी। जिससे रंगाई-छपाई और फिनिशिंग के काम को बढ़ावा मिलेगा।
दौसा और भरतपुर – स्टोन कार्विंग यानी पत्थर की नक्काशी से जुड़े कारीगरों और इकाइयों को विशेष सहायता दी जाएगी।
जयपुर – होम फर्निशिंग्स घरेलू सजावट के सामान से जुड़े उद्योगों को सपोर्ट मिलेगा। जिससे हस्तनिर्मित उत्पादों को नए बाजार उपलब्ध कराए जा सकें।
हनुमानगढ़ – कृषि उपकरण निर्माण क्लस्टर को बढ़ावा दिया जाएगा। जिससे खेती में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक औजारों के निर्माण और गुणवत्ता में सुधार हो सके।
फलोदी – एग्रो-प्रोसेसिंग यानी खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी इकाइयों को सहयोग मिलेगा। जिससे स्थानीय कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन और बेहतर पैकेजिंग संभव हो सकेगी।
योजना क्यों है खास
राजस्थान सरकार ने छोटे उद्योगों, हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए इस योजना को जनवरी 2025 में शुरू किया था। अब इसके पहले चरण में ही इतने बड़े पैमाने पर अनुदान मिलना इन क्षेत्रों के लिए बहुत बड़ी राहत है। यह कदम न सिर्फ उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक कला और छोटे कारोबार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में भी मदद करेगा

