Home » ताजा खबरें » Swami Vivekananda Jayanti: जब शिकागो में गूंजा भारत का शंखनाद, 2 मिनट तक बजती रहीं तालियां |

Swami Vivekananda Jayanti: जब शिकागो में गूंजा भारत का शंखनाद, 2 मिनट तक बजती रहीं तालियां |

Swami Vivekananda Anniversary: 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस पर जानिए स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण का प्रभाव। कैसे एक युवा सन्यासी ने 1893 में भारतीय संस्कृति का डंका पूरी दुनिया में बजाया।

हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानन्द की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन केवल एक महान संत और विचारक को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस सोच और आत्मबल का उत्सव है जिसने भारत को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाई। स्वामी विवेकानन्द का जीवन प्रेरणाओं से भरा रहा है।

उनके विचारों ने युवाओं को आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की सीख दी। हालांकि, उनके जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंग हैं, लेकिन जो घटना उन्हें विश्व स्तर पर अमर बनाती है, वह है अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण, जिसने भारत की आध्यात्मिक शक्ति को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।

विश्व धर्म सम्मेलन 1893 की पृष्ठभूमि

साल 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया था। यह सम्मेलन 11 सितंबर 1893 को शुरू हुआ और 27 सितंबर 1893 तक चला। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के विभिन्न धर्मों, मतों और संस्कृतियों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर आपसी समझ और संवाद को बढ़ावा देना था।

इस ऐतिहासिक आयोजन में कई देशों के विद्वान और धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए। भारत की ओर से इस सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे स्वामी विवेकानन्द, जो उस समय एक युवा संन्यासी थे। पश्चिमी देशों में उनकी पहचान सीमित थी, लेकिन उनके विचार गहरे और प्रभावशाली थे।

“सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका”

11 सितंबर 1893 को जब स्वामी विवेकानन्द सम्मेलन के मंच पर खड़े हुए और उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका” शब्दों से की तो पूरी सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह केवल औपचारिक स्वागत नहीं था, बल्कि उस आत्मीयता का प्रतीक था, जिसे पश्चिमी समाज ने भारत से आए इस युवा संन्यासी के प्रति महसूस किया।

अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली भाषण में स्वामी विवेकानन्द ने वेदांत दर्शन, धार्मिक सहिष्णुता और मानव एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी धर्म सत्य तक पहुंचने के अलग अलग मार्ग हैं और किसी एक धर्म को श्रेष्ठ मानकर दूसरों को नीचा दिखाना मानवता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

युवाओं के लिए आज भी प्रासंगिक संदेश

शिकागो धर्म सम्मेलन में दिए गए भाषण के बाद स्वामी विवेकानन्द को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और वे दुनिया भर में चर्चित हो गए। इसके बाद उन्होंने अमेरिका और यूरोप के कई शहरों में भारतीय दर्शन और वेदांत पर व्याख्यान दिए। इन व्याख्यानों से पश्चिमी समाज की सोच में बदलाव आया।

भारत को अब केवल एक उपनिवेश नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि के रूप में देखा जाने लगा। आज के समय में, जब दुनिया वैचारिक संघर्ष और सहनशीलता की कमी से गुजर रही है, तब स्वामी विवेकानन्द का संदेश युवाओं को आत्मविश्वास, समन्वय और मानव कल्याण का मार्ग दिखाता है। यह प्रेरणा देता है कि संस्कृति और विचारों के बल पर भारत आज भी विश्व को दिशा दे सकता है।

 

 

About Editor

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Advertisement
Cricket Score
सबसे ज्यादा पड़ गई
Share Market

शहर चुनें

Follow Us