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भारत-नेपाल सीमा पर अफीम तस्करी का भंडाफोड़, NGO की आड़ में चल रहा था धंधा |

भारत-नेपाल सीमा पर बारा पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। प्रसौनी में भारतीय नंबर प्लेट की कार से 2 किलो 24 ग्राम अफीम बरामद कर पर्सा जिले के तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस को आशंका है कि तस्कर ‘होप अलाइव चैरिटी फाउंडेशन’ नामक एनजीओ की आड़ में यह अवैध कारोबार कर रहे थे। रक्सौल और मोतिहारी कनेक्शन की भी जांच जारी है। 

हिन्द न्यूज | भारत | 10 जनवरी 2026 | पोस्टेड बाइ – जाहिद अली 

HighLights

  1. भारत-नेपाल सीमा पर 2 किलो अफीम जब्त, तीन गिरफ्तार।
  2. तस्करी में ‘होप अलाइव चैरिटी फाउंडेशन’ नामक एनजीओ का इस्तेमाल।
  3. पुलिस रक्सौल-मोतिहारी कनेक्शन और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में।

भारत–नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बारा पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। प्रसौनी गांवपालिका वार्ड नंबर 01 के नकटुवा क्षेत्र में पुलिस ने भारतीय नंबर प्लेट की कार से 2 किलो 24 ग्राम अफीम बरामद कर पर्सा जिले के तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

नेपाल पुलिस चरस धंधेबाजों का रक्सौल और मोतिहारी कनेक्शन तलाशने में जुटी है। इसके अलावा इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि तस्कर अब गैरसरकारी संगठनों (एनजीओ) की आड़ लेकर अपने अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में वीरगंज महानगरपालिका–11 निवासी 32 वर्षीय जौवाद अहमद, बहुदरमाई नगरपालिका–7 निवासी 38 वर्षीय निलेश पटेल कुर्मी और बिन्दवासिनी गांवपालिका वार्ड संख्या 02 निवासी 48 वर्षीय शेषनाथ चौरसिया शामिल हैं।

होप अलाइव चैरिटी फाउंडेशन के नाम से धंधा

पुलिस के अनुसार, क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय प्रसौनी और नशीले पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो शाखा कार्यालय पर्सा की संयुक्त टीम ने पतंजलि क्षेत्र से नकटुवा गांव की ओर जा रही भारतीय नंबर बीआर–01 सीएल–6079 कार को रोककर तलाशी ली।

जांच के दौरान कार की पिछली सीट के ऊपर काले प्लास्टिक में छिपाकर रखी गई अफीम बरामद की गई, जिसके बाद वाहन चालक सहित तीनों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।

जिला पुलिस कार्यालय बारा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल जौवाद अहमद रक्सौल से सटे पर्सा जिला वीरगंज नेपाल स्थित “होप अलाइव चैरिटी फाउंडेशन” नामक एक गैरसरकारी संस्था से जुड़े हुए हैं।

कालाधन की जांच तेज

पुलिस को आशंका है कि मादक पदार्थ तस्करी से अर्जित काले धन को खपाने के लिए इस संस्था का इस्तेमाल किया जा रहा था। बरामद कार के एनजीओ के कार्यों में उपयोग होने के साक्ष्य भी पुलिस को मिले हैं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी एक संगठित गिरोह के रूप में लंबे समय से मादक पदार्थों का कारोबार कर रहे थे और एनजीओ को इस गिरोह की एक कड़ी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि, इन तथ्यों की अधिकृत रूप से पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

इस घटना ने सीमावर्ती इलाकों में लगातार बढ़ रहे मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर मादक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जांच को और तेज कर दिया गया है।

 

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