ET की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह कर रहे हैं। इस समिति के अन्य सदस्यों में भारतीय वायु सेना और निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अधिकारी शामिल हैं।
ET की रिपोर्ट के अनुसार, समिति को अगले 30 दिनों में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। यह समिति विनिर्माण में बाधा डालने वाले मुद्दों, प्रमुख बाधाओं और विनिर्माण क्षमता की बारीकी से जांच पर विचार करेगी। समिति एक रोडमैप पर भी काम करेगी जिससे उत्पादन में तेजी लाई जा सके और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के तरीके खोजे जा सकें।
वर्तमान में, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स महाराष्ट्र के नासिक और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित दो इकाइयों में एलसीए एमके1ए जेट बना रहा है। एचएएल को पहले से ही 48,000 रुपये के 83 लड़ाकू जेट के अपने ऑर्डर में देरी का सामना करना पड़ रहा है। देरी का मुख्य कारण जेट इंजन की आपूर्ति में कमी है। इन इंजनों का निर्माण जीई द्वारा किया जाता है। इस देरी का असर भारत की आकाशीय शक्ति पर पड़ रहा है, जिसे एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी उजागर किया।
