राजनीतिक रणनीतिकार से कार्यकर्ता बने प्रशांत किशोर ने बिहार के मतदाताओं से आगामी विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडी(यू) को पूरी तरह से खारिज करने का आग्रह किया है। पटना में बोलते हुए, उन्होंने कुमार पर लगातार राजनीतिक बदलावों के माध्यम से सत्ता पर काबिज रहने का आरोप लगाया और उन्हें “शारीरिक रूप से थका हुआ और मानसिक रूप से सेवानिवृत्त” करार दिया।
किशोर ने संवाददाताओं से कहा, “नीतीश कुमार गठबंधन बदलते हुए सत्ता की कुर्सी पर काबिज रहने में कामयाब रहे हैं। इससे वे जेडी(यू) के पास कम सीटें होने पर भी सीएम बन सकते हैं।” राजनीतिक बदलावों का इतिहास कुमार का लगातार गठबंधन बदलना उनके कार्यकाल की एक खासियत रही है।
2013 में उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ लिया और 2015 में राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हो गए। 2017 तक वे भाजपा में वापस आ गए और 2022 में एक बार फिर राजद में शामिल हो गए।
पिछले साल उन्होंने एनडीए के साथ फिर से गठबंधन किया। किशोर ने चेतावनी दी कि जब तक मतदाता निर्णायक रूप से काम नहीं करेंगे, यह चक्र जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “इस चक्र को तोड़ने के लिए, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि तीर (जदयू का प्रतीक) कमल (भाजपा) के साथ न तैरे और न ही लालटेन (राजद) के साथ जले, मैं लोगों से इस तरह से वोट करने की अपील करता हूं कि जद (यू) एक भी सीट न जीत पाए। तभी हम शारीरिक रूप से थके हुए और मानसिक रूप से सेवानिवृत्त मुख्यमंत्री से छुटकारा पा सकेंगे।”
चुनावी रणनीति के रूप में कैबिनेट विस्तार की आलोचना
किशोर ने भाजपा पर कुमार को पर्दे के पीछे सत्ता का आनंद लेते हुए “मुखौटे” के रूप में इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार की आलोचना की, जिसमें चुनाव से ठीक छह महीने पहले सात नए मंत्रियों को शामिल किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया, “इस सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले सात नए मंत्रियों को शपथ दिलाने का सीधा मतलब है कि वे सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पहले लोगों को लूटना चाहते हैं।”
यथास्थिति को चुनौती देने के लिए “बदलो बिहार रैली”
सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी राजद दोनों से निराश किशोर ने बड़े पैमाने पर राजनीतिक लामबंदी की अपनी योजना की घोषणा की। उनका जन सुराज संगठन 11 अप्रैल को पटना में “बदलो बिहार रैली” आयोजित कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमने पटना में जिला प्रशासन को पत्र लिखकर 11 अप्रैल को रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी है। मुझे लगता है कि इस रैली में आने वाले लोगों की संख्या सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। हालांकि, हमें यह भी लगता है कि सत्तारूढ़ दल में घबराहट की स्थिति पैदा हो सकती है, जो अनुमति न देकर बाधा उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है।”
नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति को चुनौती
किशोर से नीतीश कुमार के बेटे निशांत की टिप्पणियों के बारे में भी पूछा गया, जिन्होंने जोर देकर कहा है कि उनके पिता बिहार का नेतृत्व जारी रखने के लिए “100 प्रतिशत” फिट हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि निशांत राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किशोर ने कहा, “मैं निशांत के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि वे सार्वजनिक जीवन में नहीं हैं। लेकिन मैं उनके पिता को चुनौती देता हूं कि वे बिना कागज देखे राज्य मंत्रिमंडल में मंत्रियों के नाम बताएं। अगर नीतीश कुमार इस तरह अपनी मानसिक स्थिति का प्रदर्शन करते हैं, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा और उनके लिए काम करना शुरू कर दूंगा।”
किशोर की यह टिप्पणी हाल ही में उनकी गिरफ्तारी के बाद आई है, जब वे बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। उनकी बढ़ती बयानबाजी और प्रचार प्रयासों से संकेत मिलता है कि वे आगामी चुनावों में अहम भूमिका निभाने का इरादा रखते हैं, और खुद को बिहार में स्थापित राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में पेश करना चाहते हैं।
