शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय यानी ओवल ऑफिस में, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी आगे बढ़कर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर हमलावर थे.
इससे पता चलता है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति को पुराने उपराष्ट्रपतियों की तरह एक विनम्र राजनीतिक सहायक के रूप में काम करने की बजाय, एक हमलावर के तौर पर सामने आने में कोई गुरेज़ नहीं है.
शुक्रवार को जेडी वेंस ने ही एक तरह से जेलेंस्की पर हमले का नेतृत्व किया था और उसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप भी इसमें शामिल हो गए थे.
यह बैठक तब तक सौहार्दपूर्ण थी, जब तक कि वेंस ने रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक समाधान की तलाश करने के लिए ट्रंप की प्रशंसा शुरू नहीं की थी.
ऐसे शुरू थी हुई बहस
अमेरिका और रूस के बीच सीधी बातचीत के आलोचक रहे ज़ेलेंस्की ने कहा, “आप किस तरह की कूटनीति की बात कर रहे हैं, जेडी? आपका क्या मतलब है?”
वेंस ने हैरान यूक्रेनी राष्ट्रपति पर कटाक्ष करते हुए कहा, “मैं उस कूटनीति की बात कर रहा हूं जो आपके देश के विनाश को रोकेगी.”
वेंस ने कहा, “सम्मानित राष्ट्रपति महोदय मैं समझता हूं कि आपका ओवल ऑफिस में आकर अमेरिकी मीडिया के सामने इस मामले पर झगड़ने का प्रयास करना अपमानजनक है.”
वेंस ने ज़ेलेंस्की पर साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से प्रचार करने का भी आरोप लगाया.
ज़ेलेंस्की ने पिछले साल सितंबर में अहम स्विंग स्टेट पेंसिल्वेनिया में एक गोला-बारूद कारखाने का दौरा किया था और व्हाइट हाउस की रेस में शामिल ट्रंप की प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस से मुलाक़ात की थी.
वेंस ने जिस तरह से व्हाइट हाउस में ज़ेलेंस्की की आलोचना की उसे रिपब्लिकन पार्टी के बीच व्यापक समर्थन मिला.
साउथ कैरोलिना के सांसद लिंडसे ग्राहम ने कहा, “मुझे जेडी वेंस के हमारे देश के लिए खड़े होने पर बहुत गर्व है.”
लिंडसे ग्राहम लंबे समय से यूक्रेन के मुद्दे पर कट्टर विदेश नीति के समर्थक हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि ज़ेलेंस्की को राष्ट्रपति के पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
वहीं अलाबामा के सीनेटर टॉमी ट्यूबरविल ने ज़ेलेंस्की को “यूक्रेनी नेवला” कहा.
न्यूयॉर्क के कांग्रेस सदस्य माइक लॉलर ने अधिक संयमित होकर कहा कि यह बैठक “अमेरिका और यूक्रेन दोनों के लिए एक खोया हुआ अवसर” था.
वेंस ने ट्रंप को मूर्ख कहकर उड़ाया था मज़ाक
किसी मेहमान राष्ट्राध्यक्ष पर वेंस का यह हमला अमेरिकी उपराष्ट्रपति के लिए सामान्य बात नहीं है.
हमेशा तो नहीं, लेकिन अक्सर उनका काम राष्ट्रपति के चुनाव में मदद करना करना और फिर निर्वाचित होने के बाद अपने बॉस यानी राष्ट्रपति के साथ चुपचाप तरीके से मिलकर काम करना होता है.
उनका काम विदेश यात्राओं में राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वफ़ादार लेफ्टिनेंट की तरह होता है, यानी राष्ट्रपति के साथ दिल की धड़कन की तरह बने रहना.
ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके उपराष्ट्रपति माइक पेंस थे जो कि काफी सौम्य स्वभाव के थे. उनके साथ वेंस की ज़्यादा तुलना नहीं हो सकती.
वेंस को व्यापक रूप से ट्रंप की विदेश नीति के पीछे के तर्क को स्पष्ट करने वाले नेता के रूप में देखा जाता है. वो लंबे समय से यूक्रेन को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता पर सवाल खड़े करते रहे हैं.
जब वेंस साल 2022 में ओहायो सीनेट सीट के लिए चुनाव लड़ रहे थे, तो उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा था, “मुझे आपके साथ ईमानदार होना होगा. मुझे वास्तव में परवाह नहीं है कि यूक्रेन का क्या होगा.”
उपराष्ट्रपति ने आठ साल पहले ट्रंप को मूर्ख कहकर उनका मज़ाक भी उड़ाया था.
उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में वो ट्रंप के ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ के आंदोलन के उत्तराधिकारी बन गए.
कट्टरपंथी मतदाताओं के बीच वेंस की लोकप्रियता के बावजूद ट्रंप ने हाल ही में फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह कहना “अभी बहुत जल्दबाज़ी” होगी कि उपराष्ट्रपति साल 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए अगली कतार में होंगे या नहीं.
इससे विचलित हुए बिना वेंस, ट्रंप के लिए एक राजनीतिक योद्धा के तौर पर अपनी भूमिका विकसित करते दिख रहे हैं.
वो प्रशासन के विरोधियों की मुखर आलोचना में राष्ट्रपति ट्रंप से भी एक कदम आगे निकल रहे हैं.
यूरोपीय देशों पर वेंस का हमला
एक ख़ास बात यह भी है कि वेंस की तीखी टिप्पणियों के शिकार कई लोग अमेरिका के साझेदार हैं.
इसकी शुरुआत पिछले महीने म्यूनिख में हुए सुरक्षा सम्मेलन से हुई. इस सम्मेलन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति नियमित रूप से हिस्सा लेते रहे हैं.
अमेरिका की पिछली उपराष्ट्रपति कमला हैरिस अक्सर वहां भाषण देती दिखती थीं.
लेकिन वेंस ने इस मौक़े का इस्तेमाल यूरोप में लोकतंत्र के हालात पर तीखा हमला करने के लिए किया. उन्होंने यूरोप के नेताओं पर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगाने और इमिग्रेशन पर काबू पाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, “अगर आप अपने ही वोटरों से डर रहे हैं, तो अमेरिका आपके लिए कुछ नहीं कर सकता.”
इस दौरान मौजूद यूरोप के नेता, सेना के जनरल और राजनयिक घबराए हुए थे.
वेंस का यह कहना कि यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए ज़्यादा पैसे ख़र्च करने चाहिए, कोई आम बात नहीं थी.
यह पूरी तरह से एक वैचारिक हमला था. यह इस बात का संकेत था कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका न केवल यूरोप से दूर जा रहा है, बल्कि अपना सुरक्षा फोकस अब चीन पर केंद्रित कर रहा है.
यह इस बात का भी संकेत था कि वो यूरोपीय महाद्वीप में ट्रंप-शैली के पॉपुलिस्म को बढ़ावा देना चाह रहे हैं.
वेंस ने अपनी स्पीच के बाद जर्मनी की अति-दक्षिणपंथी एएफ़डी पार्टी के नेताओं के साथ डिनर किया था, यह बेवजह नहीं था.
वेंस के भाषण पर यूरोपीय नेताओं, लेखकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी.
फिर भी वेंस ने ऑनलाइन उनसे बात करने का फ़ैसला किया और इतिहासकार नियाल फर्गुसन सहित कई अन्य लोगों के साथ एक्स पर विस्तृत चर्चा की.
वेंस ने उन पर “नैतिकतावादी कचरा”, “ऐतिहासिक अनपढ़” और सबसे बुरी बात कि “ग्लोबलिस्ट” होने का आरोप लगाया.
वेंस को ब्रिटेन के पीएम का जवाब
अगर इतना ही काफ़ी नहीं था, तो वेंस ने इस सप्ताह की शुरुआत में ओवल ऑफिस में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से भी भिड़ने का फ़ैसला किया.
उन्होंने अचानक की ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर से कहा कि ज़ाहिर तौर पर ब्रिटेन अपने देश में जो भी करे, यह ब्रिटेन पर निर्भर करता है, लेकिन वहां “अभिव्यक्ति की आज़ादी का उल्लंघन हुआ है, जिसका असर न केवल ब्रिटिश लोगों पर पड़ता है, बल्कि अमेरिकी टेक कंपनियों और आगे चलकर अमेरिकी नागरिकों पर भी पड़ता है.”
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने पूरी मज़बूती से इसका विरोध किया और कहा, “ब्रिटेन में अभिव्यक्ति की आज़ादी के इतिहास पर मुझे बहुत गर्व है. वहां अभिव्यक्ति की आज़ादी बहुत लंबे समय से है और आगे भी बनी रहेगी.”
यह एक तरह से म्यूनिख में दिए गए वेंस के भाषण का जवाब था, जिसमें उन्होंने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूरोपीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी.
इन क़ानूनों का मक़सद ग़लत सूचना और नफ़रत फैलाने वाले भाषणों से निपटना है जो हंगामे को बढ़ावा दे सकते हैं और लोगों को कट्टरपंथी बना सकते हैं.
वेंस इसे राजनीतिक साझेदारों और अमेरिकी कारोबारी हितों, ख़ासकर बड़ी तकनीक के लिए ख़तरे के रूप में देखते हैं.
ऐसे में कई सवाल सामने खड़े होते हैं, मसलन कि क्या वेंस का ज़ेलेंस्की पर हमला पहले से तय था, जैसा कि कुछ राजनयिक मानते हैं?
हालांकि व्हाइट हाउस के सूत्रों ने अमेरिकी अख़बारों को बताया है कि ऐसा नहीं था.
तो क्या वेंस की नई भूमिका ट्रंप के इशारे पर सामने नज़र आ रही है, जिसमें वो राष्ट्रपति के विरोधियों को सज़ा देने के लिए एलन मस्क के साथ साझेदार होंगे?
या फिर वेंस स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं और पहले से ही एक ऐसी भूमिका तैयार कर रहे हैं जो तीन साल बाद चुनाव अभियान का आधार बनेगी, जब ट्रंप फिर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर खड़े नहीं होंगे?
इन सवालों के जवाब चाहे जो भी हों, ये कहना ग़लत नहीं होगा कि जेडी वेंस महज़ ट्रंप के नंबर दो से भी ज़्यादा के तौर पर उभर रहे हैं.
