वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राज्यसभा में तमिलनाडु का मामला उठाया और सवाल किया कि कैसे वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड की वजह से गांव के लोग और एक प्राचीन मंदिर भूमि विवाद में फंस गए। उन्होंने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान पूछा, “तमिलनाडु में 1800 साल पुराना श्री चंद्रशेखर स्वामी मंदिर है।
इस गांव में मुख्य रूप से एससी और ओबीसी समुदाय के लोग रहते हैं। वहां 408 एकड़ जमीन विवादित है। और यह विवादित कैसे हो गई?” सीतारमण ने बताया कि आपस में जमीन खरीदने और बेचने वाले ग्रामीणों को वक्फ बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के लिए कहा गया था।
उन्होंने कहा, “भले ही जिला कलेक्टर ने डिजिटलीकरण प्रक्रिया के दौरान विवरण गलत दर्ज किया हो, लेकिन पूरे गांव को गलत प्रविष्टि में डाल दिया गया है। तो, हर ग्रामीण को जो अपनी जमीन पर कोई लेन-देन करना है, क्या उसके लिए वक्फ बोर्ड से एनओसी आना चाहिए? यह क्या है?” सीतारमण ने कहा, “भले ही यह बात सच हो कि राजस्व अधिकारी ने इसे गलत तरीके से दर्ज किया है, लेकिन क्या वक्फ बोर्ड यह नहीं बता सकता कि ग्रामीण क्यों आ रहे हैं और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है? लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।” उन्होंने ग्रामीणों की दुर्दशा को उजागर किया, जो “एक दर से दूसरे दर तक भागते रहे।” “गरीब लोग एक दर से दूसरे दर तक भागते रहे और कहते रहे कि जमीन कब किसी और की हो गई, जबकि वे पीढ़ियों से वहां रह रहे हैं। मंदिर का क्या हुआ? क्या मंदिर वक्फ बोर्ड ने बनवाया था?” वित्त मंत्री की यह टिप्पणी लोकसभा द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किए जाने के एक दिन बाद आई है, जिसमें रात भर चली बहस के बाद 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने इसके खिलाफ मतदान किया।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह सभी मुस्लिम संप्रदायों के अधिकारों की रक्षा करने और मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास करता है। बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस विधेयक पर लोकसभा में बोलते हुए वक्फ अधिनियम में 2013 के संशोधनों की आलोचना की और मंदिर, रेलवे और सरकारी जमीनों को वक्फ बोर्ड को सौंपे जाने के कई उदाहरण दिए।
शाह ने कहा कि इनमें तमिलनाडु के 1500 साल पुराने तिरुचेंदूर मंदिर की 400 एकड़ जमीन और हिमाचल प्रदेश की जमीन शामिल है जिसका इस्तेमाल अनधिकृत मस्जिदों के निर्माण के लिए किया गया। शाह ने कहा कि 2001 से 2012 के बीच 2 लाख करोड़ रुपये की वक्फ संपत्ति निजी संस्थानों को पट्टे पर दी गई और अकेले कर्नाटक में एक पांच सितारा होटल को 12,000 रुपये प्रति महीने के हिसाब से 1,500 एकड़ जमीन पट्टे पर दी गई।
